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सामान्य अध्ययन के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण भारत में राजनयिक यात्राए 2017

सामान्य अध्ययन के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण भारत में राजनयिक यात्राए 2017

देश नाम शीर्षक तारीख महत्व
जापान शिन्ज़ो अबे प्रधान मंत्री 13-14 सितंबर, 2017 राज्य की यात्रा
बेलोरूस अलेक्जेंडर लुकेशेंको राष्ट्रपति 11-12 सितंबर, 2017 राज्य की यात्रा
स्विट्जरलैंड डोरिस लिउथर्ड राष्ट्रपति अगस्त 30-2 सितंबर, 2017 राज्य की यात्रा
नेपाल शेर बहादुर देउबा प्रधान मंत्री 23-27 अगस्त, 2017 राज्य की यात्रा
वियतनाम फाम बिन्ह मिन्ह उप प्रधान मंत्री 3-6 जुलाई, 2017 कार्य यात्रा
मॉरीशस प्रविंड जुग्नथ प्रधान मंत्री मई 26-28, 2017 राज्य की यात्रा
फिलिस्तीन महमूद अब्बास राष्ट्रपति मई 14-17, 2017 राज्य की यात्रा
रूसी संघ इगोर शुवालवाल उप प्रधान मंत्री 9 मई, 2017 कार्य यात्रा
तुर्की रेसेप तय्यिप एर्दोगान राष्ट्रपति 30 अप्रैल -1 मई, 2017 राज्य की यात्रा
साइप्रस निकोस अनास्तासीएड्स राष्ट्रपति 25 अप्रैल -2 9 अप्रैल 2017 राज्य की यात्रा
श्री लंका रानिल विक्रमसिंघे प्रधान मंत्री 25 अप्रैल -28 अप्रैल 2017 कार्य यात्रा
नेपाल बिधा देवी भंडारी राष्ट्रपति 17 अप्रैल -19 अप्रैल 2017 राज्य की यात्रा
ऑस्ट्रेलिया मैल्कम टर्नबुल प्रधान मंत्री 10-13 अप्रैल 2017 राज्य यात्रा
बांग्लादेश शेख हसीना प्रधान मंत्री 07-10 अप्रैल 2017 राज्य यात्रा
मलेशिया नजीब रजाक प्रधान मंत्री 30 मार्च -4 अप्रैल 2017 राज्य यात्रा
स्वाजीलैंड Mswati III राजा 08-15 मार्च 2017 कार्य यात्रा
युगांडा रुहकाना रूगुंदा प्रधान मंत्री 07-12 मार्च 2017 कार्य यात्रा
संयुक्त अरब अमीरात मोहम्मद बिन ज़ैद अल नाहयान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस 24-26 जनवरी 2017 भारतीय गणराज्य दिवस की राजकीय यात्रा और मुख्य अतिथि
केन्या उहरु केन्याटा राष्ट्रपति 10-12 जनवरी 2017 राज्य यात्रा
रवांडा पॉल कागामे राष्ट्रपति 09-11 जनवरी 2017 राज्य यात्रा
पुर्तगाल एंटोनियो कोस्टा प्रधान मंत्री 07-13 जनवरी 2017 राज्य यात्रा
सर्बिया अलेक्ज़ैंडर वास्किक प्रधान मंत्री 10-12 जनवरी 2017 वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में भाग लेने के लिए
सूरीनाम अश्विन आडिन सूरीनाम के उपराष्ट्रपति 05-14 जनवरी 2017 भारतीय प्रावासी दिवास

भारत की सचिवालय प्रणाली

भारत में सचिवालय प्रणाली मूलतः ब्रिटिश काल की देन मानी जाती है जो 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट से प्रारंभ हुई जब पहली बार बंगाल के गवर्नर जनरल को प्रशासनिक सहायता देने के लिए चार सदस्य परिषद गठित की गई. 17 84 के एक्ट ने इसे 3 सदस्य बना दिया गया जबकि लार्ड वेलेजली द्वारा 1799 में मुख्य सचिव का पद सृजित किया जो केंद्र के सचिवालय पर होता था जबकि 1833 के चार्टर एक्ट में बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया और अब 1843 में बंगाल के गवर्नर के सचिवालय से भारत सरकार के सचिवालय को पृथक करते हुए केंद्रीय सचिवालय की नींव रखी गई जिसमें डलहौजी द्वारा अनेक नए विभागों जैसे रेलवे विभाग, डाक तार विभाग एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग आदि का गठन किया!

संपादकीय : आर्थिक बेहतरी की खातिर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बाजार की अपेक्षाओं के मुताबिक कदम उठाया। आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा से पहले देश के विभिन्न् बिजनेस अखबारों के सर्वेक्षणों में 80 फीसदी से ज्यादा विश्लेषकों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जताई थी। इसके अनुरूप ही रिजर्व बैंक ने रेपो रेट (जिस दर पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को कर्ज देता है) में 0.25 फीसदी की कटौती की है। अब रेपो रेट 6 प्रतिशत हो गई है, जो इसका सात साल का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट (वो दर जिस पर अपने पास जमा रकम पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को ब्याज देता है) में भी चौथाई फीसदी की कटौती की। ये दर अब 5.75 फीसदी हो गई है। 

इन दोनों फैसलों का कुल असर यह होगा कि अब बैंकों के पास आसान शर्तों पर कर्ज देने के लिए ज्यादा पैसा होगा। रिजर्व बैंक अब तय पैमाने के आधार पर ब्याज दर संबंधी फैसले करता है। ये निर्णय छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) करती है। चूंकि जून में खुदरा मुद्रास्फीति दर पांच साल के सबसे निचले स्तर (1.54 प्रतिशत) पर थी, इसलिए एमपीसी के सदस्य सहमत हुए कि ब्याज दरों में कटौती का ये सही मौका है। मतभेद सिर्फ इस पर था कि कटौती चौथाई फीसदी हो, या आधा प्रतिशत। चार सदस्यों ने चौथाई फीसदी का पक्ष लिया। 

गौरतलब है कि कर्ज दरें सस्ती होने से अर्थव्यवस्था को दो स्तरों पर लाभ होता है। मकान, कार या अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के लिए कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध होता है, जिससे लोग इन चीजों की खरीदारी के लिए उत्साहित होते हैं। इससे बाजार में मांग बढ़ती है, तो ज्यादा उत्पादन की स्थितियां बनती हैं। तब निवेशक नए निवेश के लिए प्रेरित होते हैं। नए निवेश से आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं, तो उससे रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। 

बहरहाल, ये आदर्श स्थिति है। बड़ा सवाल यही है कि क्या सचमुच मांग बढ़ेगी? एक समझ यह है कि बैंकों के पास पहले भी कर्ज देने के लिए काफी नकदी थी, किंतु ऋण लेने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे थे। उधर कारोबारियों का एक हिस्सा नोटबंदी के बाद देशभर में लागू हुए जीएसटी के कथित प्रतिकूल प्रभावों से परेशान है। वैसे रिजर्व बैंक जीएसटी को लेकर उत्साहित है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने राय जताई कि जीएसटी को देशभर में बड़ी सहजता से लागू कर लिया गया। उनका स्पष्ट कहना था कि ‘अच्छे मानसून और जीएसटी के सहजता से लागू होने से एमपीसी को ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेने में आसानी हुई। आशा की जानी चाहिए कि उनके इस बयान से जीएसटी को लेकर जारी आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी। फिलहाल, यही कहा जा सकता है कि आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती कर आर्थिक विकास दर को गति देने की दिशा में पहल की है। परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो हमारा देश अवश्य ही खुशहाली की तरफ जाएगा।

Source :http://naidunia.jagran.com/editorial/sampadikya-for-the-sake-of-economic-wellbeing-1265234?utm_source=naidunia&utm_medium=listingpage&utm_campaign=listingnews